एक विनम्र सुझाव
देश भर के जवाहर नवोदय और उत्तराखंड राज्य के राजीव गांधी नवोदय विधालयों की कक्षा 6 में प्रवेश हेतु प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है । वर्तमान प्रावधानों के अनुसार कुल सीटों में 70 % सीट्स ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के बच्चों तथा 30 % सीट्स शहरी क्षेत्र के स्कूलों के बच्चों हेतु आरक्षित की गयी हैं । इस प्रकार का निर्धारण वर्ष 1986 में तो सही था किंतु वर्तमान परिस्थियों में इसमें परिवर्तन लाये जाने की आवश्यकता है । क्योंकि आज ज्यादातर बड़े अंग्रेजी मध्यम के स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में भी खुल चुके हैं और शहरी क्षेत्रों में भी सरकारी प्राइमरी स्कूल चल रहे हैं . परिणामस्वरूप वर्तमान में इन स्कूलों में इन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे ही प्रवेश परीक्षा में सफल होते हैं और सरकारी प्राइमरी स्कूल का बच्चा पिछड़ जाता है । अब इस प्रावधान में तत्काल परिवर्तन की आवश्यकता है अब 70 % सीट सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चों तथा 30 % सीट्स प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों हेतु आरक्षित की जा सकती हैं । तभी सच्चे अर्थों में इन स्कूलों की स्थापना किये जाने के लक्ष्य की प्राप्ति हो सकेगी ताकि गरीब परिवारों के ज्यादा से ज्यादा बच्चे जो कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं उनको इन स्कूलों में प्रवेश मिल सके । हालांकि राजीव नवोदय में ग्रामीण बच्चों को 80 प्रतिशत प्रवेश मिलने लगे हैं किंतु इस अनुपात को अब ग्रामीण और शहरी नहीं वरन सरकारी और प्राइवेट स्कूल किया जाना उचित प्रतीत होता है ताकि अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की और आकर्षित किया जा सके ।
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