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Showing posts from August, 2026

सरकारी स्कूलों का रख रखाव

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स्कूलों का रखरखाव और बजट आजकल सरकारी स्कूलों की खराब दशा की और सभी का ध्यान जा रहा है। सभीसरकारी स्कूलों को समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रति वर्ष स्कूल मेंटिनेंस ग्रांट मिलता है जो कि विद्यालय की छात्र संख्या के ऊपर निर्धारित होता है । इसके अनुसार किसी भी विद्यालय को कम से कम दस हजार और अधिकतम डेढ़ लाख तक की धनराशि वार्षिक मिल सकती है । जिन स्कूलों में छात्र संख्या अच्छी होती है वहां यह धनराशि अधिक होती है और जिन स्कूलों में छात्र संख्या कम वहां यह दस हजार ही हो सकती है । इसी धनराशि में पूरे वर्ष शिक्षकों को अपने स्कूल की विभिन्न आवश्यकताएं जैसे चॉक, डस्टर, स्टेशनरी, छोटी मोटी मरम्मत, वर्ष में दो या तीन बार बच्चों और अभिभावकों हेतु मिठाई और चाय इत्यादि की व्यवस्था और अन्य खर्च । हालांकि कुछ अन्य अनुदान भी मिलते हैं जैसे कि खेल सामग्री खरीदने हेतु पांच हजार, इको क्लब भी पांच हजार, लाइब्रेरी भी इतना ही जिससे फिर यही सब सामान स्कूल को खरीदना होता है ।स्कूल को जो भी बजट प्राप्त होता है उसके सदुपयोग हेतु प्रत्येक विद्यालय का बैंक खाता होता है जिसे विद्यालय के हेड शिक्ष...

स्कूल भ्रमण

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अक्सर देखता हूं कि अधिकारी लोग स्कूलों का निरीक्षण करते हैं तो शिक्षक और बच्चे दोनों ही बड़े डरे और सहमे से दिखाई देते हैं कि पता नहीं अधिकारी बच्चों से क्या पूछ लें और शिक्षकों की कौन सी कमियां गिनवा दें । अपने ग्यारह वर्षों के अनुभव में मेरा यही प्रयास रहा है कि मेरा किसी भी स्कूल में जाना हो तो वहां का माहौल खुशनुमा रहे और बच्चे भी खुश और हंसते हुए दिखाई पड़े । महीने में एक बार किसी स्कूल में चले जाने और डांट डपट कर आने से शायद ही कोई स्थाई सुधार हो पाता है । एक और तो शिक्षकों का प्रयास रहता है कि अधिकारी उनके स्कूल में न आ धमके वहीं मुझे प्रसन्नता होती है कि मेरे ब्लॉक के शिक्षक तो खुद बोलते हैं कि सर हमारे स्कूल कब आएंगे । जब भी कोई शिक्षक साथी कुछ नवाचार करते हैं तो उनका आग्रह रहता है कि मैं उनके विद्यालय का भ्रमण अवश्य ही करूं । शायद यही आपसी विश्वास अधिकारी और शिक्षकों के मध्य बना रहे तो ब्लॉक में एक अच्छे शैक्षिक वातावरण का निर्माण आसानी से हो जाता है।  आज सुबह अपने एक स्कूल में जाना हुआ । विद्यार्थी जीवन में दो वर्ष की आर्मी ...

Upgrading the Schools in Remote Areas - Challenges

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Uttarakhand continues to face challenging geographical conditions. Even today, there are remote villages without road connectivity. Roads are being constructed to connect these habitations, but every monsoon, landslides and heavy rainfall often wash away newly constructed stretches. Naturally, villagers demand better access to education, and the Government responds by opening or upgrading schools. This is a welcome step. However, after working in remote blocks for nearly a decade, I have observed a recurring challenge: Opening a school is easy on paper. Making it function effectively is much harder. 1️⃣ Schools are often opened or upgraded based on genuine public demand. 2️⃣ Buildings may be constructed, and one or two teachers from nearby schools may initially be asked to manage the upgraded school. 3️⃣ Efforts are subsequently made to post teachers permanently. But many teachers posted in extremely difficult locations either do not join or le...