आत्मीयता
ग्रामीण इलाकों की आत्मीयता । एक नितांत अपरिचित से भी पूछ लिया जाता है कि बीड़ी पियोगे ? भले ही आज का शहरी समाज धूम्रपान को बुरा मानता हो किंतु गांव देहात में एक समय घर आए मेहमान से हुक्का और बीड़ी या चिलम के लिए भी पूछने का रिवाज हुआ करता था । यह भी सम्मान प्रकट करने का एक तरीका था कि यदि मेहमान को ऐसा कोई शौक है तो उसे भी पूर्ण किया जाय । मुझे याद आता है कि मेरे स्वर्गीय पिताजी स्वयं धूम्रपान नहीं करते थे किन्तु उनके एक मित्र घर आया करते थे तो उनके लिए उनकी पसंद के ब्रांड का बीड़ी का बंडल और माचिस सदैव उपलब्ध रखते थे ।
एक पीढ़ी थी जो ट्रेन या बस में यात्रा के समय कुछ भी खाने पीने से पहले आस पड़ोस वाले लोगों से जरूर पूछ लिया करती थी । अब वह पीढ़ी विलुप्त होती जा रही है किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे जाते हैं ऐसे पुराने लोग ।
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