शिक्षक दिवस विशेष 05.9.2026
गुरु से शिक्षक और शिक्षक से सरकारी गुरु जी और प्राइवेट स्कूलों के सर बनने तक की शिक्षकों की यात्रा ।
एक गांव में जन्म होने के बाद शायद शिक्षकों से मेरा परिचय शायद तभी हुआ जब स्वयं स्कूल जाना शुरू किया था। वर्ष शायद 1978 रहा होगा हमारे गांव में उस समय तीन सरकारी स्कूल चलते थे । एक बालिका प्राइमरी जिसे कन्या पाठशाला, एक बालक प्राइमरी जिसे प्राइमरी स्कूल और एक सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल जिसे हम बड़ा स्कूल बोला करते थे। उसी वर्ष गांव में एक क्रांतिकारी घटना हुई और पता नहीं कैसे हरिद्वार से प्रतिदिन रेलगाड़ी से आने वाली तीन महिलाओं ने गांव के बच्चों के लिए एक मोंटेसरी स्कूल खोलने की हिम्मत कर दिखाई । उन दिनों सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी कक्षा 6 से सिखाई जाती थी और इन मैडमों जिन्हें हम बच्चे आंटी जी बोलते थे ने गांव वालों को बताया कि हम नर्सरी से ही बच्चों को A B C D सिखाया जाना शुरू करेंगे । उनके इस क्रांतिकारी विचार से गांव के कुछ परिवार प्रभावित हुए और उन्होंने अपने बच्चों का प्रवेश गांव के सरकारी प्राइमरी में न करा कर इस नए स्कूल में करा दिया । उन दिनों सरकारी स्कूलों में भी थोड़ी बहुत फीस ली जाती थी और किताबें और स्कूल यूनिफॉर्म भी खुद ही खरीदी जाती थी । इस स्कूल ने फीस सरकारी से थोड़ा ज्यादा शायद दस रुपये महीना की लेनी शुरू की । तीनों ही सरकारी स्कूलों का अपना भवन था किन्तु इस स्कूल का अपना कोई भवन नहीं था शायद परोपकार के चलते या थोड़े बहुत किराए पर इस स्कूल को कभी किसी की खाली पड़ी बैठक में स्थान मिला तो कभी पशुओं को रखने के स्थान जिसे हमारे यहां घेर बोला जाता में स्थान मिला । गांव में लगभग तीन या चार अलग अलग स्थानों पर चलने वाले इसी स्कूल से मेरी कक्षा 5 उत्तीर्ण हुई । इन तीनों मैडम ने गांव के बच्चों को शर्ट को पेंट के अंदर तथा टाई और बेल्ट बांध कर स्कूल आना सिखाया जबकि सरकारी स्कूलों के बच्चे कमीज और पजामे में चले जाया करते थे । अब पता नहीं यह स्कूल था या किसी NGO का कोई प्रयास हमारे स्कूल का नाम शुरू में ग्रामीण बाल कल्याण केंद्र रखा गया था जिसका नाम बाद में परिवर्तित होकर ग्रामीण बाल विकास केंद्र रखा गया । समय समय पर हमारे स्कूल में कहीं बाहर से विशिष्ट से दिखने वाले कोई सज्जन मुख्य अतिथि के तौर पर आया करते थे जिन्हें सभी लोग मंत्री जी बोला करते थे । इन्हीं मैडमों और मंत्री जी की कृपा दृष्टि से हम गांव के बच्चों को एक बार नैनीताल भी घुमाने ले जाया गया । मुझे याद है कि जून का महीना था और हम बच्चों को जिस एक कमरे में रखा गया था उसकी छत जगह जगह से टपकती थी और हमारा भोजन भी वहीं बनता था जो एक महिला बनाया करती थी । खैर इन सभी खट्टी और मीठी स्मृतियों के साथ हमने अपनी कक्षा 5 की परीक्षा गांव के ही प्राइमरी में जाकर दी जो कि उन दिनों बोर्ड की परीक्षा हुआ करती थी। अब चूंकि इस प्राइवेट से स्कूल से कक्षा 5 हुई तो पिताजी द्वारा मेरा अगला स्कूल गांव से 05 किलोमीटर दूर नजदीकी शहर ज्वालापुर में देखा जो कि एक जूनियर हाई स्कूल था। मुझे आज भी याद है कि इस स्कूल में कक्षा 6 में जाने के बाद वहां हम गांव के बच्चों से ABCD लिखवाई गई जो हमने आसानी से लिख दी थी । यह स्कूल हिंदी माध्यम ही था और सरकारी ही स्कूलों का पाठ्यक्रम चलता था किन्तु ड्रेस थोड़ी अच्छी थी और कक्षाओं में फर्नीचर और पंखे लगे हुए थे । इसी स्कूल से फिर सरकारी ही पाठ्यक्रम वाली कक्षा 8 की बोर्ड परीक्षा पास की । चूंकि ये सब भले ही प्राइवेट स्कूल थे लेकिन हिंदी मीडियम ही थे तो अगले स्कूल भी हिंदी मीडियम ही मिलते रहे । यानी कक्षा 9 से 12 फिर वापसी सरकारी ही स्कूलों में हुई । आज शिक्षक दिवस के दिन मै पुनः अपने सभी गुरु जनों को सादर प्रणाम करता हूं कि समय समय पर आपने ही नई नई बातें बताई आप सभी की स्मृति आज भी मनो मस्तिष्क पर अंकित है क्योंकि हम बच्चों के लिए आपका व्यक्तित्व बहुत ही बड़ा था हमारे लिए आप सरकारी और प्राइवेट नहीं थे, हमारे लिए आप ऐसे भी गुरु जी नहीं थे जिन्हें आज कोई भी चलता फिरता टोक देता है या स्कूलों में आकर अपने पद या नेता गिरी का रौब जमा कर चला जाता है। आप सभी का व्यक्तित्व ऐसा था कि आपसे कोई भी बदतमीज़ी से बात करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था । अब शायद समय बहुत बदल गया है, सब कुछ फ्री कर दिया गया है और शिक्षक की गरिमा भी बहुत कुछ प्रभावित हुई है जो अब गुरु से शिक्षक और शिक्षक से सरकारी कर्मचारी की ही रह गई है । अब आप लोगों से शिक्षा लेने वाला श्रद्धा भाव से शिक्षा नहीं लेता, प्राइवेट वाला मोटी फीस देकर शिक्षा खरीद रहा है और सरकारी वाला आपको डरा और धमका कर ।
शिक्षक दिवस की सभी को पुनः बहुत बहुत शुभकामनाएं 💐👍🏼
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