शिक्षक दिवस स्मृति
वर्ष 2009 था मैने सरकारी टीचर की जॉब से त्याग पत्र देकर आर्मी पब्लिक स्कूल ज्वाइन किया था। उस वर्ष मेरा शिक्षक दिवस का पहला ही अनुभव था । इसी बीच कुछ और स्कूलों में भी मैने अप्लाई कर रखा था किन्तु आर्मी स्कूल की ज्वाइनिंग पहले ही आ गई थी तो जुलाई में इधर आ गया था। मुझे कक्षा 6 का क्लास टीचर बनाया गया और दो ही महीनों में सभी बच्चों से बहुत ही घुल मिल गया था। ये बच्चे प्राइमरी विंग से आए थे और मेरा विषय भी SSt था जो कि बच्चों के लिए बहुत बोझिल भी हुआ करता था इसके अलावा इतिहास में अनेकों ऐसे बड़े बड़े शब्द आ जाते थे जो हिंदी होते थे किन्तु अंग्रेजी में ही लिखे जाते थे जैसे कि महानिभिष्क्रमण और महामाष्टकभिषेकम इत्यादि इन शब्दों को मैं हिंदी में ही लिख कर बच्चों को समझा दिया करता था जो कि उन्हें काफी सरल लगता था । खैर इसी बीच अगस्त माह का अंतिम और सितंबर का पहला हफ्ता शुरू हुआ और मैं देखता कि बच्चों द्वारा किसी योजना पर कार्य करना शुरू कर दिया गया है चूंकि ये सारे प्राइमरी विंग से ही आए थे तो पहले से एक दूसरे को जानते भी थे मैं देखता कि कक्षा में आने से पहले ये कुछ गुप्त मंत्रणा सी करते हैं और जैसे ही मैं क्लास में आता अपनी अपनी सीट पर भाग कर बैठ जाते। इनकी गुप्त मंत्रणा से मुझे कुछ आभास सा हो गया कि ये शायद टीचर्स डे की तैयारी में अपने ही स्तर से लग गए हैं। खैर तभी बिरला स्कूल रानीखेत से मेरे लिए कॉल आ गई और उन्होंने न जाने क्या सोच कर मुझे 05 सितंबर को ही इंटरव्यू हेतु बुला लिया । अब मेरे लिए बहुत बड़ी उलझन कि क्या करूं क्योंकि मैं बच्चों को देखता था कि अपने स्तर से कुछ तैयारी में लगे हैं और यदि मैं उस दिन स्कूल नहीं आऊंगा तो बेचारों का दिल टूट जाएगा वैसे तो दूसरे विषय अध्यापक भी आते हैं लेकिन शायद बच्चे इस दिन की शुरुआत अपने क्लास टीचर के साथ करते हैं खैर मैने मन बना लिया था कि भले ही मुझे बिरला वाला इंटरव्यू छोड़ना पड़े मैं इस दिन बच्चों को छोड़ कर नहीं जाऊंगा। मैने बिरला स्कूल को अपनी समस्या बताते हुए मेल भेजी खैर उनका सकारात्मक उत्तर आया और मेरी इंटरव्यू की डेट उनके द्वारा कुछ पीछे हटा दी गई । अब आया शिक्षक दिवस का दिन मैं अपनी कक्षा में पहुंचा तो देखता हूं कि बच्चों ने खुद ही बोर्ड को भी सजा दिया है और पता नहीं कहां से रिबन क्लास के द्वार पर लगा दिया और कैंची इत्यादि भी ले आए और बोले सर रिबन काटिए बहुत सारे हाथ से लिखे कार्ड, पेन ये सभी गिफ्ट और उनका जोश देख कर मन अभिभूत हो उठा और महसूस हुआ कि यदि मैं इस दिन इनके बीच नहीं होता तो शायद ये मायूस जरूर होते क्योंकि दिन की शुरुआत क्लास टीचर से ही होनी थी । खैर मुझे बहुत अच्छा लगा और सभी बच्चों के लिए अपनी तरफ से समोसे मंगवाये । मैं आर्मी स्कूल में 02 ही वर्ष रहा बाद में मेरा चयन उत्तराखंड सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के रूप में हो गया था l एक शिक्षक के रूप में मेरी यात्रा रुड़की के एक अन्य निजी स्कूल 06 माह, दो माह जवाहर नवोदय और करीब 08 माह एक सरकारी स्कूल तथा अंतिम 02 वर्ष आर्मी स्कूल यानी करीब 03 वर्ष कुछ माह की ही अलग अलग स्थानों पर रही किंतु आज भी इन सभी स्कूलों के कुछ बच्चों के संपर्क में हूं जो आज भी टीचर्स डे विश कर देते हैं और उनके मुझे दिए हुए कार्ड आज भी मैने सम्भाल कर रखे हुए हैं और प्रतिवर्ष मैं इन्हें फिर से देखता हूं और शेयर भी करता हूं ।
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