स्कूल भ्रमण
अक्सर देखता हूं कि अधिकारी लोग स्कूलों का निरीक्षण करते हैं तो शिक्षक और बच्चे दोनों ही बड़े डरे और सहमे से दिखाई देते हैं कि पता नहीं अधिकारी बच्चों से क्या पूछ लें और शिक्षकों की कौन सी कमियां गिनवा दें । अपने ग्यारह वर्षों के अनुभव में मेरा यही प्रयास रहा है कि मेरा किसी भी स्कूल में जाना हो तो वहां का माहौल खुशनुमा रहे और बच्चे भी खुश और हंसते हुए दिखाई पड़े । महीने में एक बार किसी स्कूल में चले जाने और डांट डपट कर आने से शायद ही कोई स्थाई सुधार हो पाता है । एक और तो शिक्षकों का प्रयास रहता है कि अधिकारी उनके स्कूल में न आ धमके वहीं मुझे प्रसन्नता होती है कि मेरे ब्लॉक के शिक्षक तो खुद बोलते हैं कि सर हमारे स्कूल कब आएंगे । जब भी कोई शिक्षक साथी कुछ नवाचार करते हैं तो उनका आग्रह रहता है कि मैं उनके विद्यालय का भ्रमण अवश्य ही करूं । शायद यही आपसी विश्वास अधिकारी और शिक्षकों के मध्य बना रहे तो ब्लॉक में एक अच्छे शैक्षिक वातावरण का निर्माण आसानी से हो जाता है।
आज सुबह अपने एक स्कूल में जाना हुआ । विद्यार्थी जीवन में दो वर्ष की आर्मी NCC की ट्रेनिंग यहां काम आ जाती है ।
#beokidiary
Comments
Post a Comment