सरकारी स्कूलों का योगदान
अक्सर सुनने में आता है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से निकले बच्चे सफल नहीं हो पा रहे और वर्तमान में तो सरकारी स्कूलों और शिक्षकों को समाज में एक बहुत बड़ा खलनायक सा बना कर दिखाया भी जा रहा है। मैं स्वयं भी एक ग्रामीण परिवेश और सरकारी स्कूलों से ही पढ़ा हूं । यही विचार मन में आ रहा था कि आखिर सरकारी स्कूल क्या वाकई कुछ नहीं कर रहे।हमारी व्यवस्था प्राइमरी स्कूलों से शुरू होकर माध्यमिक तक जाती है प्राथमिक शिक्षा में बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए लिए अलग अलग तरह के संघर्ष होते हैं किंतु जैसे ही बच्चा हमारे किसी हाई स्कूल या इंटर कॉलेज में आ जाता है तो उसकी पढ़ाई में काफी अंतर आ जाता है। प्राइमरी के मुकाबले अब पढ़ाई ज्यादा व्यवस्थित हो जाती है और बच्चे को अलग अलग विषय के शिक्षक भी मिलने शुरू हो जाते हैं जहां प्राइमरी स्कूलों में आज भी 60 बच्चों तक RTE Act के अनुसार 02 शिक्षकों का ही मानक है तो वही दो शिक्षक कैसे 05 कक्षाओं के अलग अलग विषय पढ़ा रहे होंगे यह भी सोचने वाली बात है।सरकारी माध्यमिक स्कूलों से कक्षा 12 पास करने वाले बच्चे भी सफल होते हैं किंतु शायद उनकी सफलता अखबारों क...
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